सुर्ख़ गुल की ख़ुशबू से गुलज़ार तेरा घर
तेरे मेरे इश्क़ का अख़बार तेरा घर
काश ऐसी गर्दिश-ए-तक़दीर हो मेरी
मेरा घर इस पार औ उस पार तेरा घर
अब हमारे बीच में कुछ भी नहीं, लेकिन
आज भी है सब्ज़ इक किरदार, तेरा घर
गो ज़माना और दुनिया नर्क है ये सब
मेरी ख़ातिर स्वर्ग का इक द्वार, तेरा घर
याद करता हूँ तुझे मैं आज भी, लेकिन
याद आता है मुझे हर बार, तेरा घर
— AYUSH SONI















