
कि बज़्म-ए-यार में भी आजकल शामिल नहीं होता
बिना तेरे मिरा ये दिल भी मेरा दिल नहीं होता
समझ जाता अगर वो इश्क़ में कुछ बेबसी मेरी
वो मेरा हम सेफ़र होता मिरा क़ातिल नहीं होता
— AYUSH SONI
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