मेरी मोहब्बत में कोई शामिल न हो
ऐसा न हो वो भी मिरे क़ाबिल न हो
काग़ज़ की कश्ती में अगर बैठा हूँ मैं
तूफ़ाँ उधर हो या न हो साहिल न हो
वो मेरी क़िस्मत में अगर लिक्खी नहीं
दिल मिरा उस के हुस्न का काइल न हो
आसानियोँ से मुझ को नफ़रत है बहुत
काँटे सफ़र में गर न हो मंज़िल न हो
— Meem Alif Shaz















