तुम दिया जलाओगे वो हवा चला देगा
क़त्ल भी करेगा वो शोर भी मचा देगा
उस के सामने कैसे अपने हाथ फैलाऍं
वो सवाल करने पर भी हमें सज़ा देगा
कैसे बे-वफ़ा को हम बे-वफ़ा पुकारेंगे
पहले ही ज़माने को अपना ग़म सुना देगा
किस तरफ़ चले हो तुम इस तरफ़ ज़माना है
ख़्वाब कैसे आऍंगे नींद भी उड़ा देगा
उस के क़िस्से मत पूछो ज़ुल्म से भरे हैं 'शाज़'
इतना ज़ुल्म करता है रूह भी जला देगा
— Meem Alif Shaz















