tamasha ik naya kar baitha hooñ | तमाशा इक नया कर बैठा हूँ

  - Rohan Hamirpuriya

तमाशा इक नया कर बैठा हूँ
जला कर शहर को घर बैठा हूँ

बुला कर माँ को घर से शहर में
सवेरे से मैं दफ़्तर बैठा हूँ

मिला करते थे हम जिस इक जगह
उसी टपरी पे अक्सर बैठा हूँ

विलायत से पढ़े यारों के बीच
मैं ही तो सब सेे बदतर बैठा हूँ

तेरी तो शादी है और इक मैं हूँ
तेरी महफ़िल में हँस कर बैठा हूँ

  - Rohan Hamirpuriya

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