किसको बोलें अपना है
सब लोगों ने डसना है
शहर की रौनक़ ठीक मगर
पहाड़ पे जा के बसना है
हाकिम जी मैं समझ गया
हर जुमले पे हँसना है
उसके हाथ की बिरयानी
जीवन भर का सपना है
सारी शोहरत तुम रख लो
गाँव का पानी चखना है
As you were reading Shayari by Rohan Hamirpuriya
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