waqt rahte ham gham ka har sabab bataa dete | वक़्त रहते हम ग़म का हर सबब बता देते

  - Rohan Hamirpuriya

वक़्त रहते हम ग़म का हर सबब बता देते
ग़म का था जो बादल इक ज़ेहन से हटा देते

पूछता अगर मंज़िल का वो रास्ता हम से
हम भी उसको हँस कर के बस तेरा पता देते

तेरा हाथ कर देते हम रक़ीब की जानिब
इक ख़ुशी की ख़ातिर हम ख़ुद को ये सज़ा देते

राज़ी हो गया होता तू अगर निभाने को
सब महल अटारी हम तुझ पे ही लुटा देते

होने लगता है मेरा ख़्वाब इक मुकम्मल जब
जो ख़याल सरकश है वो मुझे जगा देते

चंद रोज़ चल जाता सिलसिला निभाने का
ग़ैर से त'अल्लुक़ सब तुम भी गर मिटा देते

ज़ख़्म ठीक होने में थोड़ा वक़्त कम लगता
हाथों से अगर अपने वो दवा पिला देते

  - Rohan Hamirpuriya

Dushmani Shayari

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