teraa tha dariyaa main aur tu hi meraa saahil tha | तेरा था दरिया मैं और तू ही मेरा साहिल था

  - Rohan Hamirpuriya

तेरा था दरिया मैं और तू ही मेरा साहिल था
तेरा ही था वो किनारा जो मुझको हासिल था

कोई मंज़िल न मिला करती थी भटकने पर
रहगुज़र ऐसी ही थी वो मैं जिसका राहिल था

ज़िन्दगी जीने का फ़न आया ही नहीं यारों
या यूँँ कह लो था जो मुर्शिद मेरा वो ज़ाहिल था

अब झिझक ही नहीं मुझको ये बात कहने में
तू मुहब्बत थी मेरी और मैं तेरे क़ाबिल था

अब कहाँ खो गए वो सिलसिले मुहब्बत के
इक वो भी वक़्त था जब हर-सू तू ही शामिल था

  - Rohan Hamirpuriya

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