kabhi lagta hai sab theek ho gaya hai | कभी लगता है सब ठीक हो गया है

  - Lalit Mohan Joshi

कभी लगता है सब ठीक हो गया है
कभी लगता है सब मेरा खो गया है

ये बेकार है गर बात यार फिर तो
मुझे रोग ये क्या कैसे हो गया है

ये वो दौर यक़ीनन नहीं हो सकता
पुराना वो तो इक दोस्त खो गया है

लिखा मैंने यूँँ ग़म अपना फोन में फिर
वो चिट्ठी का ज़माना तो खो गया है

समंदर हो चला साथ मेरे फिर से
किनारा यूँँ ग़मों से ही हो गया है

मैं कश्ती तो चला लूँ मगर मेरा तो
भरोसा कोई फिर तोड़ जो गया है

'ललित' रो दे न कमज़ोर इतना है पर
वो कोई वजह-ए-शक से रो गया है

  - Lalit Mohan Joshi

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