बे-वजह तुम मुस्कुराते रहो
एक उत्सव बस मनाते रहो
वो उजाड़ें नफ़रतों से जहाँ
तुम मोहब्बत से सजाते रहो
सुख निभाओ मत निभाओ कभी
दुख मुकम्मल तुम निभाते रहो
फूल मुरझाते रहेंगे यहाँ
गुल नए पर तुम लगाते रहो
हो नहीं सकता किसी और का
हक़ तुम्हीं मुझपर जताते रहो
बोली प्यारी है तुम्हारी हमें
गालियाँ ही तुम सुनाते रहो
दिल दिया तुमको बड़े प्यार से
चाहो तो तुम दिल दुखाते रहो
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