पेड़ जो ये कटा हुआ है अब
रोया पंक्षी ये क्या हुआ है अब
जो नहीं था बुरा किसी का भी
उसका ही क्यूँँ बुरा हुआ है अब
पहले मेरी दवा हुआ था जो
क्यूँँ मेरी वो सज़ा हुआ है अब
मसअले सब सुलझ गये हैं अब
कम ये फिर मसअला हुआ है अब
अच्छा सब कुछ तेरा हुआ था बस
सब बुरा फिर मेरा हुआ है अब
खुश नहीं है रक़ीब से भी वो
ये मुझे भी पता हुआ है अब
दुश्मनी भी तो इस तरह की है
बैरी से राबता हुआ है अब
बिछड़े थे हम मनोज पहले ही
फ़ासला बस अदा हुआ है अब
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