न पूछ कैसे भला उस भरम से निकले थे
नफ़ीस हुस्न के ज़ुल्म-ओ-सितम से निकले थे
ग़ुमान सब्र हया डर असीर थे उस
में
कमाल था कि ये चारों बहम से निकले थे
वो दास्ताँ थी जो ग़ज़लों की शक्ल में उतरी
तमाम शे'र हमारी क़लम से निकले थे
— Nikhil Tiwari 'Nazeel'
नफ़ीस हुस्न के ज़ुल्म-ओ-सितम से निकले थे
ग़ुमान सब्र हया डर असीर थे उस
में
कमाल था कि ये चारों बहम से निकले थे
वो दास्ताँ थी जो ग़ज़लों की शक्ल में उतरी
तमाम शे'र हमारी क़लम से निकले थे
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