होश फ़रहत गुमाँ दिल हज़र ले गया

एक तूफ़ाँ हज़ारों नगर ले गया

मौत की तेज़ आदत लगा दी हमें
और जीने का सारा हुनर ले गया

ग़म की चालें किसी को पता ही नहीं
कब हमीं से हमारी ख़बर ले गया

जिस महल्ले ने मातम नचाया बहुत
तू बता किस बहाने उधर ले गया

वो परिंदे सफ़र से तो लौटे ही थे
देख सय्याद मेरे शजर ले गया

— Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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