नई तरकीब ग़म जब तक निकालेपुराने ख़्वाब से कुछ दिन चला लेहमारी ज़िंदगी का क्या भरोसाकिसी दिन मौत से नज़रें मिला लेअदब से छोड़ देंगे शा'इरी हमअगर ये आशिक़ी ख़र्चे उठा लेदिलों की तीरगी भी पूछती हैकहाँ से ला रहे इतने उजालेज़माना मुद्दतों से ले रहा हैहमारे नाम जो उस ने उछाले— Nikhil Tiwari 'Nazeel'