सराबों के सर से फ़लक खींच लाया
ये सहरा यगाना चमक खींच लाया
अभी ही तो बारिश गिरी और देखो
समुंदर ज़मीं से नमक खींच लाया
जहाँ से चला था वहीं आ चुका हूँ
न जाने कहाँ की सड़क खींच लाया
ज़माने लगे थे तुझे ढूँढ़ने में
मैं झटके से तेरी झलक खींच लाया
तिरे शहर के हर परिंदे की ज़द से
बियाबान जंगल चहक खींच लाया
मुरस्सा-ग़ज़ल आज लिखने से पहले
ये क़ागज़ ही तेरी महक खींच लाया
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