khaalis darakht chaak nigah-daar ho rahe | ख़ालिस दरख़्त चाक़ निगह-दार हो रहे

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

ख़ालिस दरख़्त चाक़ निगह-दार हो रहे
ये देख कर कि अब्र शरर-बार हो रहे

पानी से ख़ून मिल गया शायद इसीलिए
दिन रात बेकुसूर गिरफ़्तार हो रहे

इक ओर ज़िंदगी ही हमेशा ख़फ़ा रही
ऊपर से हादसे भी लगातार हो रहे

माँ बाप की दु'आ ने ख़ुदास मिला दिया
मुझको लगा कि पीर असरदार हो रहे

उसने कहा कि आप ही लहजा सुधार लें
अब एक एक लफ़्ज़ गिराँ-बार हो रहे

अल-हाल चश्मदीद ख़रीदे गए यहाँ
यानी तमाम चोर ख़बरदार हो रहे

दौलत की ताकतें मुझे मालूम हैं निखिल
बस देखना है कौन वफ़ादार हो रहे

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

Paani Shayari

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