जब तुम को ही दिल से कोई रिश्ता नहीं रखना
मुझ को भी कोई झूठा भरोसा नहीं रखना
वो ज़िद पे है रहना है उसे मेरे ही दिल में
मय-ख़ाने में मुझ को तो फ़रिश्ता नहीं रखना
अच्छा हूँ तुम्हें देख के नज़दीक रहो तुम
कहती है नहीं आप को अच्छा नहीं रखना
प्यासा है मगर दश्त की चाहत में लगा है
कहता है मुझे काम पे दरिया नहीं रखना
रह रह के तड़पता है मचलता है वो लेकिन
कहता है उसे दिल में दोबारा नहीं रखना
— Praveen Sharma SHAJAR















