ख़ुशी के गीत गाए जा रहा हूँ
मैं इक सदमा दबाए जा रहा हूँ
मेरे दिल पर अभी है वेहशत-ए-बू
सो ख़ुशबू में नहाए जा रहा हूँ
वो मुझ को छोड़ देना चाहती है
मगर मैं ही निभाए जा रहा हूँ
शग़फ़ तितली से मुझ को क्या रहेगी
मैं रस्म-ए-गुल निभाये जा रहा हूँ
— Praveen Sharma SHAJAR















