मिसरा-कारी का फ़न नहीं आया
गिरिया ज़ारी का फ़न नहीं आया
अब भी तुमको ही दुनिया कहता हूँ
दुनिया दारी का फ़न नहीं आया
और भी काम थे मुझे यूँँ भी
सो ख़ुमारी का फ़न नहीं आया
तुम से बिछड़ा हूँ चैन से हूँ मैं
बे-क़रारी का फ़न नहीं आया
मुँह पे सच बोलने की आदत है
रिश्ते-दारी का फ़न नहीं आया
जिस सेे रखता हूँ दिल से रखता हूँ
झूठी यारी का फ़न नहीं आया
तुम भी अटके रहे वफ़ा पर ही
जाँ निसारी का फ़न नहीं आया
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