तल्ख़ मौसम में मीठी बातें कर
चाय में जैसे चीनी बातें कर
टूटने को है सच्चा 'इश्क़ अपना
जोड़े रखने को झूठी बातें कर
आज कल मन उदास रहता है
थोड़े दिन तक हवस की बातें कर
मुझको दुनिया से कोई मतलब नइँ
मेरे महबूब ख़ुद की बातें कर
गुफ़्तुगू अपनी सुनने वालों को
शर्म आ जाए वैसी बातें कर
ग़ज़लें लिख कर रिझाना है तुझको
रूठ जा मुझ सेे कड़वी बातें कर
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