Prit
Prit
Ghazal

तल्ख़ मौसम में मीठी बातें कर

चाय में जैसे चीनी बातें कर

टूटने को है सच्चा इश्क़ अपना
जोड़े रखने को झूठी बातें कर

आज कल मन उदास रहता है
थोड़े दिन तक हवस की बातें कर

मुझ को दुनिया से कोई मतलब नइँ
मेरे महबूब ख़ुद की बातें कर

गुफ़्तुगू अपनी सुनने वालों को
शर्म आ जाए वैसी बातें कर

ग़ज़लें लिख कर रिझाना है तुझ को
रूठ जा मुझ से कड़वी बातें कर

— Prit

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