aoraq yuñ ulatne se kuchh faaeda nahin | औराक़ यूँँ उलटने से कुछ फ़ाएदा नहीं

  - Shajar Abbas

औराक़ यूँँ उलटने से कुछ फ़ाएदा नहीं
फ़रहाद सा जहाँ में कोई सर-फिरा नहीं

चल साथ मिल के कोई नया हल तलाश लें
तर्क-ए-तअल्लुक़ात सही फ़ैसला नहीं

हमराह चल रहे हैं मुसलसल ये किसलिए
ख़ुशियों का गर ग़मों से कोई राब्ता नहीं

वो 'उम्र भर रहेगा मुसीबत में मुब्तिला
जो अपनी ग़लतियों से सबक़ सीखता नहीं

फ़ुर्क़त की चिलचिलाती हुई धूप में मिरा
ये जिस्म जल गया है मगर दिल जला नहीं

हम बात कर रहे हैं हमें आ के देख ले
जो भी ये कह रहा है सनम बोलता नहीं

मैं सोचता था सब मिरी हालत पे रोएँगे
अफ़सोस पर यहाँ तो कोई ग़म-ज़दा नहीं

वो जिसकी इक नज़र का है मुश्ताक़ मेरा हुस्न
वो शख़्स मेरी सिम्त कभी देखता नहीं

महफ़ूज़ अपनी ज़ात को कैसे रखूँ शजर
दुश्मन हैं मेरे लाख कोई हमनवा नहीं

  - Shajar Abbas

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