दोस्तों रोज़ सुब्ह-ओ-शाम करो
यौम-ए-महशर का इंतिज़ाम करो
फ़र्ज़ जो काम है वो काम करो
सारी दुनिया में हक़ को आम करो
निकलो अब बे-रुख़ी के पैकर से
आओ बैठो कोई कलाम करो
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