मैं तेरे प्यार में हर हद से गुज़र जाऊँगा
तुझसे बिछड़ूँगा तो वा'दा है मैं मर जाऊँगा
'इश्क़ के दरिया में जिस रोज़ उतर जाऊँगा
क़ैस के जैसा मैं दुनिया में उभर जाऊँगा
तू मेरे वास्ते ग़मगीन न हो जान-ए-वफ़ा
पुरख़तर राहों पे मैं हँस के गुज़र जाऊँगा
तू चली जाएगी जब बस्ती से हिजरत करके
तो मैं कूचे में तेरे शाम-ओ-सहर जाऊँगा
मैं शजर हूँ मैं शजर मौत से मैं डरता नहीं
क्या समझते थे डराओगे तो डर जाऊँगा
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