क़ैस ये बोला मुझ सेे आओ रक्स करो
दश्त-ए-जुनूँ में ख़ाक उड़ाओ रक्स करो
हाकिम का तुम खौफ़ न खाओ रक्स करो
सीने से तुम मुझको लगाओ रक्स करो
आशिक़ हो तुम गर तो तुम पर वाजिब है
'इश्क़ का नग्मा ज़ोर से गाओ रक्स करो
रक्स करें हैं दुनिया वाले वस्ल के दिन
आओ फ़िराक़-ए-यार मनाओ रक्स करो
महफ़िल में गुमसुम मत बैठो आओ चलो
जाम पियो और जाम पिलाओ रक्स करो
ये जो सारे हिज्र के मारे फिरते हैं
इनसे कहो सहरा में जाओ रक्स करो
शे'र शजर तुम लिक्खो उसकी आँखों पर
और उसकी तस्वीर बनाओ रक्स करो
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