बस हाल पूछ लो कि ज़माना ख़राब है
तदबीर कुछ न दो कि ज़माना ख़राब है
पहले तो जान-बूझ के तुम गर्त में गिरो
फिर कह दिया करो कि ज़माना ख़राब है
कोई हुनर तो सीख लो जीने के वास्ते
ख़ुद को सँवार लो कि ज़माना ख़राब है
पहले तो तुम निबाह ग़लत शख़्स से करो
रो रो के फिर कहो कि ज़माना ख़राब है
जब मसअले न हल हो सके बात-चीत से
तब जंग ही लड़ो कि ज़माना ख़राब है
कब कौन जाने झट से अकड़ को निकाल दे
हद में रहा करो कि ज़माना ख़राब है
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