हैं मुयस्सर कई अलम ख़ुश हैं
आँख होती रही है नम ख़ुश हैं
एक बस हम ही ख़ुश नहीं हम से
हम को पाकर तो वरना ग़म ख़ुश हैं
लोग अव्वल तो ख़ुश नहीं हम से
और हैं भी तो कितने कम ख़ुश हैं
बात वैसे नहीं ख़ुशी की ये
फिर भी उस की ख़ुशी में हम ख़ुश हैं
— Sumit Panchal















