खेल जाता है जान पर कोई

जीत जाता है हार कर कोई

रहने लाइक़ कहाँ है घर कोई
जिस में दीवार है न दर कोई

काम कोई मेरे नहीं आता
काम लेता है मुझ से हर कोई

कुछ न मंज़िल न रास्ते का पता
और दरपेश है सफ़र कोई

मुझ को उड़ने का शौक़ जब भी हुआ
काट देता है मेरे पर कोई

— Sumit Panchal

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