जिन को हम जान से प्यारों की तरह देखते हैं

हम को वो फूल भी ख़ारों की तरह देखते हैं

रास्ता उन को दिखाना भी ज़रूरी है बहुत
हम को जो लोग सितारों की तरह देखते हैं

आप को कैसे मुहब्बत हो किसी की हासिल
आप तो सब को शिकारों की तरह देखते हैं

ऐसे बच्चे भी कहाँ जाएँ कहाँ डूब मरे
जिन को माँ बाप ख़सारों की तरह देखते हैं

ऐसा सोने सा बदन है कि उसे हसरत से
हम बरहमन भी सुनारों की तरह देखते है

रो रही है वो लिपट कर यूँ मरे दुश्मन से
जंग हम जीत के हारों की तरह देखते हैं

— Vishnu virat

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