kya nahin mirii hatheli men samaa saka hai | क्या नहीं मेरी हथेली में समा सकता है

  - Vishnu virat

क्या नहीं मेरी हथेली में समा सकता है
जब तिरा हाथ मिरे हाथ में आ सकता है

और तो ख़ैर नहीं बात किसी के बस की
हाँ पिकासो तिरी तस्वीर बना सकता है

तुझ को गिरने नहीं दूँगा मैं यक़ीं कर मेरा
हाथ अपना तू मिरी ओर बढ़ा सकता है

एक शहज़ादा है जो नींद में है बरसों से
तेरा बोसा ही उसे होश में ला सकता है

मैं वो ख़ुशबू हूँ अकेली रही है जो जन्मों
क्या कोई फूल मिरा साथ निभा सकता है

आबले क्या हैं फ़क़त क़ल्ब की हरियाली हैं
तू भी इस दश्त में कुछ पेड़ लगा सकता है

  - Vishnu virat

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