dekh le mujhko to deewaar se sat jaati hai | देख ले मुझको तो दीवार से सट जाती है

  - Vishnu virat

देख ले मुझको तो दीवार से सट जाती है
वो परी शर्म की चादर से लिपट जाती है

'इश्क़ बिखरा तो जफा, अश्क़ ग़म-ओ-हिज्र बना
धूप टूटे तो कई रंग में बँट जाती है

तीसरा आया मुहब्बत के गणित में जब भी
दो की संख्या भी यहाँ तीन से कट जाती है

हुस्न ऐसा कि फिसलती हैं निगाहें सबकी
ऐसा रस्ता है कि हर कार पलट जाती है

एक तू है कि किताबों में नहीं आ पाया
एक दुनिया है कि मिसरे में सिमट जाती है

दोस्तों ने यही कह कह के पिलाई मुझको
एक सिगरट से कहाँ ज़िंदगी घट जाती है

  - Vishnu virat

Beti Shayari

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