taarikh hai gawaah kii aisa nahin kiya | तारीख़ है गवाह की ऐसा नहीं किया

  - Vishnu virat

तारीख़ है गवाह की ऐसा नहीं किया
हम शायरों ने प्यार में धोखा नहीं किया

फिर तुम बिना जो काट दी तन्हा ही काट दी
कितनी कड़ी ही धूप में रिक्शा नहीं किया

फिर मुस्कुराए साँस ली खुश भी रहे हो तुम
तुमने हमारे बाद में क्या क्या नहीं किया

मेरे बुजुर्गों ने मुझे ग़ुरबत तो की अता
लेकिन किसी भी शाह को पंखा नहीं किया

ये झूठ मेरा बोलना तुमको किया न याद
उसका भवों को तान के कहना नहीं किया

पागल न कर सका ये तेरा 'इश्क़ भी मुझे
इस ज़हर ने भी जिस्म को नीला नहीं किया

उस्ताद थी वो 'इश्क़ की यूँँ तो बड़ी मगर
ठीक उसने मेरा एक भी मिसरा नहीं किया

  - Vishnu virat

Dhoop Shayari

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