सभी को जंग का मंज़र दिखाई देता है
घर अपना टूटने पे घर दिखाई देता है
गुनाह ख़ुद से अगर हो महज़ है क़तरा बस
ख़िलाफ़ हो तो समुंदर दिखाई देता है
परिंदे एक से लगते हैं आसमानों में
हमें तो फ़र्क ज़मीं पर दिखाई देता है
फिर उन को लोग बराबर नहीं समझते जिसे
हर एक ज़ात बराबर दिखाई देता है
हमारे दिल को सभी मानते हैं पत्थर पर
सबब भी अश्क का कंकर दिखाई देता है
— Aadil Sulaiman















