जब मुसीबत आप पर आती दिखेगी
तब मसाइल में कहीं रोटी दिखेगी
गर उतारेंगे सब इक दूजे की इज़्ज़त
दौर-ए-आख़िर में जहाँ नंगी दिखेगी
शोहरतें रिश्तों पे गर हावी रही तो
क़ब्र के मैदाँ में बस मिट्टी दिखेगी
आँख से पर्दा हटेगा जब हवस का
ग़ैर महरम तब बहन बेटी दिखेगी
ये जहाँ इक शीश के मानिंद है बस
आप अच्छे हैं तो फिर अच्छी दिखेगी
— Aadil Sulaiman















