अच्छे दिन की ज़बान दे दे हमकाहे झूठा बयान दे दे हमचीख़ते क्यूँ हो सारे चुप है तोकाट कर क्या ये कान दे दे हमसारे अंधे ही देख पाते हैया'नी आँखों को दान दे दे हमझूठ को पाँव दे दिए तुम नेसच की सारी थकान दे दे हमतुम तो बस देखते है मछली कोकैसे तुम को कमान दे दे हम— Aadil Sulaiman