सूरत पे मर मिटे न थी कोई शिकायतें
फिर क्यूँ सुनेगा आज वो तेरी शिकायतें
देते रहेंगे साथ लकड़हारे का अगर
लाज़िम है साँस छाँव की होंगी शिकायतें
किरदार उम्र का नया पहनेंगे आप जब
होगी नसीहतें सभी जो थी शिकायतें
कितनो का हाथ थाम के पंखे पे ले गई
लोगों की बस निगाह व उन की शिकायतें
मरती रहेगी यक-दिली आँगन में आप के
जब तक के साँस रब्त में लेंगी शिकायतें
— Aadil Sulaiman















