
हिंद की दहलीज़ पर पैदा हुई उर्दू ज़बाँ
है ज़बानें और भी पर इश्क़ की उर्दू ज़बाँ
कुछ अदब का, कुछ हुनर का, कुछ सुकूँ का ज़ाइक़ा
लब पे आए तो लगे है चाशनी उर्दू ज़बाँ
— Aadil Sulaiman
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