अब अधूरा ही ये राब्ता रहने दो
दोनो के दरमियाँ फ़ासला रहने दो
ज़ख़्म है इक मिरा जो हरा रहने दो
हम को इस दर्द का आसरा रहने दो
हाल वो जानने लौट भी सकता है
घर का दरवाज़ा मेरा खुला रहने दो
इश्क़ अव्वल नशा है नशों में अगर
तो हमें भी नशा ये चढ़ा रहने दो
हम को इस हाल में रहने से रोको मत
यार तुम को मेरा वास्ता रहने दो
— Abhay Aadiv















