na aaya chain mujhko qaid se uski rihaa hokar | न आया चैन मुझको क़ैदस उसकी रिहा होकर

  - Abhay Aadiv

न आया चैन मुझको क़ैदस उसकी रिहा होकर
मुझे अब देखना है 'इश्क़ में पूरा फ़ना होकर

अलग वो तो हुआ अब भी नहीं मुझ सेे जुदा होकर
कभी साया मिरा बनता कभी मिलता हवा होकर

कहाँँ अब लौटकर वो आने वाला है, मगर फिर भी
दिलासा दिल को देता हूँँ हकी़क़त ये पता होकर

उसे मैं बेवफ़ा आख़िर कहूँँ भी तो कहूँ कैसे
वो लगता बेवफ़ा भी तो नहीं है बेवफ़ा होकर

मैं आगे बढ़ नहीं पाया अभी भी याद से उसकी
मुझे वो रोकती है जैसे कोई दायरा होकर

  - Abhay Aadiv

Gunaah Shayari

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