aaj todo raabta inaat se | आज तोड़ो राब्ता इनात से

  - Aamir Ali

आज तोड़ो राब्ता इनात से
बात करनी है ख़ुदा की ज़ात से

नींद अब आती नहीं है रात भर
ख़्वाब कुछ मजबूर हैं हालात से

बात ग़ुर्बत के तमाशे की सुनो
एक बस्ती जल गई ख़ैरात से

अब ये सूनापन करे है शोर सा
बात जो बनती नहीं है बात से

घर पुराना है दरारों से भरा
क्यूँँ गिला-शिकवा करें बरसात से

  - Aamir Ali

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