mat kaho ab KHaak hooñ main gard hooñ | मत कहो अब ख़ाक हूँ मैं गर्द हूँ

  - Aamir Ali

मत कहो अब ख़ाक हूँ मैं गर्द हूँ
नूर का क़तरा हूँ थोड़ा ज़र्द हूँ

ज़ुल्म तेरे सब समझता हूँ मगर
घर के ज़िम्मेदार सा इक फ़र्द हूँ

जाम-ए-इशरत कौन समझा है तुझे
देख लो मैं आज कूचा-गर्द हूँ

ख़ुश समुंदर आप आया लौट कर
जैसे मैं साहिल तेरा हमदर्द हूँ

कौन पहरा दे रहा आमिर मुझे
कोई पर्दे में हूँ या बेपर्द हूँ

  - Aamir Ali

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