किसे बे-ख़बर ढूँढता है
इधर हूँ उधर ढूँढता है
वो मुझ से मिला कुछ यूँँ जैसे
बयाबाँ बसर ढूँढता है
नए शहर में हर मुसाफ़िर
किराए का घर ढूँढता है
नज़र से नज़र तो मिली पर
निशाना जिगर ढूँढता है
सफ़र पर जो निकले तो पाया
सफ़र हम सेफ़र ढूँढता है
वो साक़ी तो हाज़िर है हर-दम
ये मय-कश पहर ढूँढता है
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