आजकल हिचकियाँ नहीं आती
इसलिए चिट्ठियाँ नहीं आती
जब से पंखे उतार फेंके हैं
स्टूल और रस्सियाँ नहीं आती
हम तो फ़ौरन हिसाब करते हैं
इसलिए फब्तियाँ नहीं आती
राह पुल ने बहुत कठिन कर दी
तट पे अब कश्तियाँ नहीं आती
सबके कमरे अलग-अलग हैं अब
इसलिए सिसकियाँ नहीं आती
इसलिए गुल उदास बैठे हैं
देखने तितलियाँ नहीं आती
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