नंबर बदला घर बदला दफ़्तर बदला
उसने ख़ुद को गिरगिट से बढ़-कर बदला
पहले तो उसने मुझको जी-भर बदला
फिर उसने मन बदला और दिलबर बदला
उसने दीवारें बदली छप्पर बदला
मैं तो ध्यान में उतरा और अंबर बदला
मंज़िल मैंने समझी उसने मक़ाम बस
अगले सफ़र पे निकला तो रहबर बदला
अवसादस तू ही बाहर ला सकता है
तेरी इक समझाइश ने मंज़र बदला
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