pakke ghar kehne ko hi pakke the | पक्के घर कहने को ही पक्के थे

  - Aatish Indori

पक्के घर कहने को ही पक्के थे
वे तो कच्चे घरों से कच्चे थे

तब नहीं चलती थी दवा-गोली
हम तो कंगाली में ही अच्छे थे

ज़िंदगी अपनी ख़ुद तबाह की है
मेरे कमबख़्त कान कच्चे थे

तुम तो सच बोल सकते थे भाई
मेरे घर में तो बाल-बच्चे थे

शहर घुसपैठ किस तरह करता
गाँव जाने के मार्ग कच्चे थे

शहर को गाँव रोकता कब तक
शहर के पास ढेर गच्चे थे

इस धरा पर ही स्वर्ग बसता था
जब तलक दिल हमारे सच्चे थे

दरमियाँ आ गई हैं दीवारें
घर बसाने से पहले अच्छे थे

  - Aatish Indori

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