ये नहीं कहता कि तुम दिल से मिटा दो मुझ को
जब तलक लौट नहीं आता भुला दो मुझ को
तुम ने जब जान लिया है कि मैं इक क़तरा हूँ
इल्तिजा है कि समुंदर से मिला दो मुझ को
जानता हूँ कि मेरा तुम से बिछड़ना तय है
इक मोहब्बत की कहानी में छुपा दो मुझ को
मुझ से देखी नहीं जाती है ये सूनी दुनिया
मैं हूँ इक शम्अ' मोहब्बत की जला दो मुझ को
मैं ने चाहा था बस इतना कि मिला दो उस से
चाहा कब था उसी के जैसा बना दो मुझ को
— Aatish Indori















