इस तरह ज़िंदगी गुज़ारी है
जैसे हर साँस दिल पे भारी है
दाँव पर रोज़ जिस्म रहता है
दिल तवायफ़ नहीं जुआरी है
उस की तस्वीर देखते रहना
हम ग़रीबों को रोज़गारी है
इश्क़ के रास्ते में कुछ भी नहीं
बे-क़रारी ही बे-क़रारी है
हर कोई है यहाँ निशाने पर
है कोई जो यहाँ शिकारी है
— Ankit Yadav















