मिरी ज़बाँ कतर तो दीजिए हुज़ूर
ज़रा ये काम कर तो दीजिए हुज़ूर
मैं हूँ ख़राब आदतों का मुंतज़िर
मुझे सज़ा इधर तो दीजिए हुज़ूर
चलाइए न अपना लोमड़ी दिमाग़
सही कोई ख़बर तो दीजिए हुज़ूर
कहाँ छुपा रहे हैं आप अपना हाथ
हमारे हाथ पर तो दीजिए हुज़ूर
डरे डरे से लग रहे हैं आप तो
अब ओखली में सर तो दीजिए हुज़ूर
कलर गुलाब का है होंठ पर लगा
ज़रा इधर अधर तो दीजिए हुज़ूर
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Ankit Yadav
our suggestion based on Ankit Yadav
As you were reading Urdu Shayari Shayari