laga kar ke gale vo shaam tak yuñ hi nahin milta | लगा कर के गले वो शाम तक यूँँ ही नहीं मिलता

  - Ankit Yadav

लगा कर के गले वो शाम तक यूँँ ही नहीं मिलता
तसल्ली से मुझे वो मुश्तरक यूँँ ही नहीं मिलता

कोई तो बात है जिसको वो सीने में दबाए है
वो पहले की तरह अब बेधड़क यूँँ ही नहीं मिलता

फुहारें बारिशों की मेरी गलियों पे नहीं पड़ती
पता मेरा उन्हें बरसों तलक यूँँ ही नहीं मिलता

हज़ारों ख़्वाहिशें दिल की जलानी पड़ गईं उनको
समुंदर जैसी आँखों से नमक यूँँ ही नहीं मिलता।

  - Ankit Yadav

Shaam Shayari

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