बड़ी जल्दी मचा दी उसने कारीगर का होने में
अभी तो वक़्त था काफ़ी उसे पत्थर का होने में
उसे ये बात कहता भी तो आख़िर किस तरह कहता
बड़ा था फ़र्क उसके और जादूगर का होने में
रिहा तो हो गया मैं क़ैद से लेकिन इन आँखों को
ज़माना लग गया उस ख़्वाब से बाहर का होने में
मुझे इस बात की नाराज़गी तो है के वो मुझको
भुलाने लग गया है फिर किसी बिस्तर का होने में
नए रस्ते बनेंगे और नए जंगल बसर होंगे
नदी जिस ओर जाएगी किसी सागर का होने में
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